बेटियों को आगे बढ़ने दो
कोमल मन में अरे इंसानों कुछ तो रंग भरने दो ।
पढ़ा लिखा कर बेटियों को तुम आगे बढ़ने दो ।।
जैसा प्यार करते बेटों से कुछ उनसे भी करने दो ।
बेटियां हैं फूल उपवन का उनको भी तुम खिलने दो ।।
होते अत्याचार देख बेटियों पर तो आसमान भी रोता है ।
घर स्वर्ग से सुन्दर बन जाता जहां बेटियों का सम्मान होता है।
बेटे कुल का दीपक तो बेटियां कुल का उजाला कहलाती है ।
बेटा एक कुल पोषित करता तो बेटियां दो कुल तरा जाती हैं ।
इक डाली पर दो फूल अब तो तुम उनको खिलने दो ।
पढ़ा लिखा कर बेटियों को अब तो तुम आगे बढ़ने दो ।
सभ्यता और संस्कृति की रक्षा वहन उनको करने दो ।
अनन्त आकाश की ऊंचाई में उनको अब उड़ने दो ।।
जब घर में बेटी जन्में खुशियों का उत्सव मनने दो ।
उम्मीदों के आसमान की ऊंचाई अब तो नापने दो ।।
मत करो निराश उन्हें उम्मीदों के फूल अब खिलने दो ।
नहीं बेटियां बोझ किसी पर उनको नदियां अब बनने दो ।।