॥ वीर तेजाजी छंद ॥
खरनाल गाँव में जन्म लियो, ताहड़ जी के राज दुलारे।
रामकुंवरी माँ की आँख के तारे, धौलिया गौत्र के रखवारे।।
लाछा गुजरी रोवत आई, बोली तेजा गाय छुड़ा दे।
मेर लुटेरे ले गये गायें, वीर तू आके लाज बचा दे।।
लीलण घोड़ी चढ़ वीर चल्यो, हाथ में भाला चमकायो।
मेरों को मार भगायो तेजा, गायन को वापस लायो।।
जंगल में नाग मिला इक रोज, तेजा से वचन लियो भारी।
वचन निभावन खातिर वीर ने, जीभ पर डस लियो भारी।।
सुरसुरा में धाम बनायो, आज भी ज्योत जले है प्यारी।
जो कोई सच्चे दिल से ध्यावे, तेजा करे है मदद सारी।।
-चंदन सिंह सारंगदेवोत