भारत माँ के लाल
नमन करता हूँ हर उस जवान को,
जो बढाता है देश की शान को,
करता है रक्षा हमारी और
सबक सिखाता है पाकित्तान को।
नमन करता हूं.........
तेरे ऋणी रहेंगे सदा,
झुकने न देना आत्मसमान को,
खड़ा है तु बाडर्र पर,
क्रुबाँ करने अपनी जान को,
परवा न की कभी तुने अपनी,
न झुकने दिया देश के सम्मान को।
नमन करता हूं .......
है उस माँ की गोद महान,
जिसने तुझको जन्म दिया,
त्यागकर सारी ममता अपनी,
बाडर्र पर तैनात किया,
होगी कितनी पत्थर वो दिल से,
जिसने देश को एक जाबाँज दिया।
करते हैं हम पृशंसा उसकी,
जिसने नई सीख दी ईस जहाँँन को।
नमन करता हूं.......
कितने कष्टों को सहकर
तू बाडर्र पर पहरा देता है,
हम सोते हैं घरों के अंंदर,
तू दुशमन से लोहा लेता है,
हैं तेरी बहादुरी के किस्से दुनिया जहाँन मैं,
मर कर भी अमर हो जाये,
सब तरसते हैं ईस समान को।
नमन करता हूं........
आज तेरे ही दम पर,
हम सीना ठोक के कहते हैं,
वो दिन भी अब दूर नही,
POK को वापस लेते हैं।
कितना भी बौंखलाये दुशमन,
कितना भी चिल्लाये दुशमन,
छलनी कर देंगे हर वो सीना,
जो कशमीर के सपने देखते हैं।
बचाकर कितनी जानों को,
वीरौं के समानों को,
नमन करता हूं........
सर हिमालय का ऊँचा रहता है
तेरे ही बलिदान से,
थर-थर काँँपे दुशमन तेरे,
जैसे काल डरे भगवान से,
चौड़ी छाती चौड़ा सीना ,
बात करे सममान से,
फौंजी तो हिरो हैं सबके,
मौहताज नही किसी पहचान के।
नमन करता हूं........
जब भी खोलेगा ईतिहास कोई,
तेरा नाम जुबाँ पर आयेगा,
याद करेगा 65, 71 करगिल कैसे रह जायेगा,
देश बचाने तुम सबसे पहले आये थे,
जब लूट रहे थे असमत देश की,
तुमने दुशमन भगाये थे,
कितने ठोके कितने मारे,
कितनौं को जहनुम पहुचाया था,
अब चलो रक्षने दो पिछली बातें,
तुम तैयार रहो नये ईनतिहान को।
नमन करता हुँ हर उस जवान को,
जो बढाता है देश की शान को।
जय हिंद