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आँखों मे हसीं तसव्वुर बना दे-पुरानी डायरी से

Brijmohan Bisht

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी आँखों मे एक हसीं तसव्वुर बना दे।
        
                                                    
                            
मैं जो गुनगुनाना चाहूँ ऐसी ग़ज़ल बना दे।।

मेरी आँखों मे सजे है ख्वाब कई हसीन।
उन ख्वाबों को तू बस हकीकत बना दे।।

यूँ ही आ जायेगा का मजा जीने का यारों।
मेरे सीने में फिर कोई नया ज़ख्म बना दे।।

दोस्त तो बहुत मिले है इस जिंदगी में मुझे ।
जो हो सके तो अब कोई एक रकीब बना दे।।

ना रहेगा डर भी अब मौत का इन आँखों।
सामने मेरे तू उस कातिल की तस्वीर बना दे।।

वो घटाए वो बादल भी रह गए होंगे प्यासे।
चल आज फिर अश्कों का समन्दर बना दे।।

दर्द की चुभन सीने में रहेगी हरदम साथ ही।
आकर तू इस चुभन कुछ और तेज बना दे।।

वो गुमनाम रखता है तेरी हर खबर पे नजर।
उसकी उस नजर को तू मेरा मुक़द्दर बना दे।।
              - बृज मोहन सिंह बिष्ट
एक महीने पहले
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