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ज़िंदगी को देखा है

Brajesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी को देखा है अक्सर
        
                                                    
                            
अपनी ओर आते हुए
फिर ठिठक कर किसी और
तरफ़ बड़ी दूर जाते हुए
ये हुआ इक बार न
ना जाने पर कितनी ही दफ़ा
सच है क्या जो कहते हैं सब
कि ज़िंदगी है बेवफ़ा
ये दिखाती है सपने
अनगिनत कई रंग के
और मिलाती लोगों से
कई रंग कई ढंग के
फिर आता है इक वक़्त
जब रहना सपने ना कोई लोग ही
नज़रें चुराती सी नज़र आती है
उस पर ये ज़िंदगी
और हम रह जाते हैं अकेले
अपने हाल पे पछताते हुए
ज़िंदगी को देखा है...।
2 महीने पहले
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