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ख़्वाबों के सिरहाने पे

Brajesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़्वाबों के सिरहाने पे सर रख कर
        
                                                    
                            
ले रही करवटें ज़िंदगी
ना दिल में चैन बेचैन नैन
गिन रही सिलवटें ज़िंदगी
हर एक ख़्वाब माँगे जवाब
कर रही हरक़तें ज़िंदगी
कोई भी आस आए ना रास
लग रही अटपटी ज़िंदगी
ख़्वाबों के सिरहाने पे...।
एक महीने पहले
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