विज्ञापन

हम सफ़र गुम है रास्ता गुम है

BRAJESH KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर सफर गुम है रास्ता गुम है
        
                                                    
                            
कौन जाने किसे राब्ता गुम है
ज़ुबान मुंह में है लगता ही नहीं
बात निकली मगर सदा गुम है
ढूंढने जिनको चले कहाँ पर हैं
हम किधर हैं वही पता गुम है
हर जरूरत में याद आया कोई
वर्ना भूले हैं जो वास्ता गुम है
हर दिलों में बेचैनी का आलम है
सभी अरमानों का फाख्ता गुम है
जाने किस दौर में आज जमाना है "वफ़ा"
अमन ओ चैन आशनाई ज़ाब्ता गुम है
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all