आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हम सफ़र गुम है रास्ता गुम है

                
                                                         
                            हर सफर गुम है रास्ता गुम है
                                                                 
                            
कौन जाने किसे राब्ता गुम है
ज़ुबान मुंह में है लगता ही नहीं
बात निकली मगर सदा गुम है
ढूंढने जिनको चले कहाँ पर हैं
हम किधर हैं वही पता गुम है
हर जरूरत में याद आया कोई
वर्ना भूले हैं जो वास्ता गुम है
हर दिलों में बेचैनी का आलम है
सभी अरमानों का फाख्ता गुम है
जाने किस दौर में आज जमाना है "वफ़ा"
अमन ओ चैन आशनाई ज़ाब्ता गुम है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर