विज्ञापन

जिसने मेरे सुख दुःख को संग संग जिया

Brajesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिछड़ गई मुझसे मेरी ज़मीं
        
                                                    
                            
बिछड़ गया मेरा आसमां
बिखर गया अब तो मेरा जहाँ
क्या ही करुँ अब मैं जाऊं कहाँ
जिसने संवारी मेरी ज़िंदगी
आँचल में थी जिसकी हर इक ख़ुशी
जिसने मेरे सुख दुःख को संग संग जिया
कहां उसको अब ढूंढूं जाऊं कहाँ
बिखर गया अब तो...।
मेरे सपनों को थी जिसने परवान दी
मेरी मुश्किलें हर पल आसान की
वही अब मुझे छोड़ है जाने कहां
उसे ढूंढने अब मैं जाऊं कहाँ
बिखर गया अब तो...।
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all