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विनाश के संरक्षक

binoy mb

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर दौर में
        
                                                    
                            
कुछ भेड़ की खाल ओढ़े भेड़िए होते हैं,
जो कला-प्रेमी होने का मुखौटा पहनकर
तालियों में ज़हर छुपाए फिरते हैं।

वे कलाकारों,
और कलात्मक आत्माओं के करीब आते हैं,
उन्हें सँवारने नहीं,
बल्कि उनकी रोशनी को
धीरे-धीरे निगल जाने के लिए।

इन नकली रसिकों से सावधान रहो,
इन मुलायम ज़ुबान वाले जल्लादों से,
जो प्रशंसा को हथियार
और अपनापन को जाल बना देते हैं।

हर गूँजती हुई तालियों के पीछे
सच्चा दिल नहीं धड़कता।
3 महीने पहले
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sushil pandey

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