साहित्य मेरे लिए
रॉकेट उड़ाने का
एक निजी
(हस्तमैथुनी) प्रयोग है।
अगर
कुछ ही पलों में
कामयाबी मिल जाए—
तो वह कविता है।
अगर
ईंधन को
कई दिनों तक
जलाते रहना पड़े—
तो वह उपन्यास है।
उसका
छोटा-सा मॉडल—
लघुकथा।
और अगर
पीटकर,
सहलाकर,
रुलाकर,
किसी भी तरह
उसे प्रसवित करना पड़े—
तो वह आलोचना है।
मेरी इस
सृजनात्मक अश्लीलता का रहस्य
छिपाने में
मुझे
ज़रा भी दिलचस्पी नहीं।
मेरा जीवन
कोई
पवित्र ग्रंथ नहीं—
वह तो
एक खुली किताब है!
जिसके हर पन्ने पर
मेरे रॉकेट-प्रक्षेपण
के प्रयोगों की
रंगीन,
निःश्वास-धुएँ की
धुंध तैरती रहती है!