आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

साहित्य : मेरी रॉकेट प्रयोगशाला

                
                                                         
                            साहित्य मेरे लिए
                                                                 
                            
रॉकेट उड़ाने का
एक निजी
(हस्तमैथुनी) प्रयोग है।

अगर
कुछ ही पलों में
कामयाबी मिल जाए—
तो वह कविता है।

अगर
ईंधन को
कई दिनों तक
जलाते रहना पड़े—
तो वह उपन्यास है।

उसका
छोटा-सा मॉडल—
लघुकथा।

और अगर
पीटकर,
सहलाकर,
रुलाकर,
किसी भी तरह
उसे प्रसवित करना पड़े—
तो वह आलोचना है।

मेरी इस
सृजनात्मक अश्लीलता का रहस्य
छिपाने में
मुझे
ज़रा भी दिलचस्पी नहीं।

मेरा जीवन
कोई
पवित्र ग्रंथ नहीं—

वह तो
एक खुली किताब है!

जिसके हर पन्ने पर
मेरे रॉकेट-प्रक्षेपण
के प्रयोगों की
रंगीन,
निःश्वास-धुएँ की
धुंध तैरती रहती है!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
48 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर