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माज़ी की जब कभी भी हसीं वादियां मिलीं

Bilal Ahmad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माज़ी की जब कभी भी हसीं वादियां मिलीं
        
                                                    
                            
इस दिल की सरज़मीं पर तबाहकारियां मिलीं

उजड़े हुओं के साथ रहने को जब गए
हमको अमीरे शहर की अय्यारियां मिलीं

सिंगार उनका ईद से कम भी नहीं है कुछ
जब वस्ल की बदन पर तैयारियां मिली

~ अहमद बिलाल बदायूंनी
5 महीने पहले
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Anil Pandey

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