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और उजाला उजाले से झलकेगा ऐ मास्टर

Bhutaram Meghawanshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अंधकार दिए से नहीं
        
                                                    
                            
उजाले के प्रकाश से मिटेगा
और उजाला उजाले से झलकेगा ऐ मास्टर
आज अंधेरा छाया हुआ है
रात का अंधेरा नहीं
जातिवाद का अंधेरा
सम्प्रदायवाद का कोहरा
भ्रष्टाचार की धुंध
अंहकार तमिस्र
ओछी नीयत की ओस
दानवी रात दबाए बैठी है इंसानियत

ऐ मास्टर अब तू बन रवि
तू दिनकर बन
तू कवि नहीं कविता बन
और फैला उजियारा
जिससे मिट जाए
सारे जहां से तिमिर

 
एक महीने पहले
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