ना नाच तु किसी और के ईशारे में ।
ना घर बसा लेना संमदर किनारे में॥
कोई किसी का नही होता
छोड़ चला जायेगा तुझे रोता ।
ना अपनी मंजिल खोना
ना किसी का तू होना॥
बडे मिठे बोल में ना फंसना
ना यूं ही किसी को हाँ कहना ।
एक बार अपने जमीर से पूछना
ये संमद है कि दरिया है क्या इसमें बहना॥
- भुनेश्वर अनंत