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देख, ये पेड़ भी मंद-मंद मुस्काएँ,

Bhuneshwar Anant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन्द्रधनुष की सतरंगी दुनिया
        
                                                    
                            
देख बोली मुनिया,
वाह! वाह! मैया,
देख जरा कितनी रंगीन है दुनिया।

दिख रहा पास में, है कितनी दूर,
आसमाँ सजा है जैसे सजती दुल्हन,
चमक रहा सारा आँगन,
जैसे चमक रहा शीतलपुर।

पास ही बैठा सूरज पश्चिम में इतराता,
जैसे बैठी हठेली सखी,
काले बादल तैर रहे आसमान में,
जैसे तैरती परी लगाए पांखी।

सावन महीने में है आज पूर्णमासी,
हे! सखी, फिर छाई मन में कैसी उदासी?
जैसी रूठी दुल्हन,
देख इन्द्रधनुष के रंगों में डूब जा,
जैसी डूबी चितवन।

नीले अम्बर को देखो,
कैसे इठलाती है,
चाँद गगन पर अभी छिपी बैठी है।

देख, ये पेड़ भी मंद-मंद मुस्काएँ,
मेरे मन में विश्वास जगाएँ,
चिड़ियाँ भी इठलाती हैं,
देख मुझे मुस्काती हैं।


 
21 घंटे पहले
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