हम तो चलना चाहते थे,
तेरे संग हमसफर बनके ।
मगर तूने ही ठुकरा दिया
दुश्मन समझके ।।
अरे! क्या गुनाह था मेरा,
यही तेरे संग उड़ना चाहा था ।
मगर ख्वाबो से पहले
मेरा पैर जमीन पर खींचा था ॥
अब क्यो रोते हो,
उस वक्त मै फरेबी लगता था ।
तुम्हारी हर सांस
तो उसमें बसता था ।।
हम तो चलना चाहते थे,
तेरे संग हम सफर बनके ।
मगर तूने ही ठुकरा दिया
दुश्मन समझ के ।।
-भुनेश्वर अनंत