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हम तो चलना चाहते थे हमसफर बनके

                
                                                         
                            हम तो चलना चाहते थे,
                                                                 
                            
तेरे संग हमसफर बनके ।
मगर तूने ही ठुकरा दिया
दुश्मन समझके ।।

अरे! क्या गुनाह था मेरा,
यही तेरे संग उड़ना चाहा था ।
मगर ख्वाबो से पहले
मेरा पैर जमीन पर खींचा था ॥

अब क्यो रोते हो,
उस वक्त मै फरेबी लगता था ।
तुम्हारी हर सांस
तो उसमें बसता था ।।

हम तो चलना चाहते थे,
तेरे संग हम सफर बनके ।
मगर तूने ही ठुकरा दिया
दुश्मन समझ के ।।
-भुनेश्वर अनंत 
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44 मिनट पहले

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