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उपवास

भास्करानंद झा भास्कर

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह जब कभी भी आती है
        
                                                    
                            
मेरे पास
व्रत या उपवास में
भड़ जाता है
मेरा हृदय
करुणा, ममता, प्रेम से
सहज आश्चर्य से देख कर
उसकी हालत--
सूखे फ़ूले फ़टे ओठ,
प्यास से व्याकुल कंठ
चेहरे पर थकान
पल -पल झुकती नजर
और मन में विश्वास की शक्ति

मुझमे भी
बहने लगता है तब
अध्यात्मिकता का प्रवाह
बह जाते हैं जिसमें
सभी ईर्ष्या, द्वेष ,अवसाद , विषाद
सभी दमित इच्छाएँ
और बच जाती है मुझमें
सम्यक जीवन
जीने की अभिलाषा ....
- भास्करानंद झा भास्कर
10 घंटे पहले
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