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उपवास

                
                                                         
                            वह जब कभी भी आती है
                                                                 
                            
मेरे पास
व्रत या उपवास में
भड़ जाता है
मेरा हृदय
करुणा, ममता, प्रेम से
सहज आश्चर्य से देख कर
उसकी हालत--
सूखे फ़ूले फ़टे ओठ,
प्यास से व्याकुल कंठ
चेहरे पर थकान
पल -पल झुकती नजर
और मन में विश्वास की शक्ति

मुझमे भी
बहने लगता है तब
अध्यात्मिकता का प्रवाह
बह जाते हैं जिसमें
सभी ईर्ष्या, द्वेष ,अवसाद , विषाद
सभी दमित इच्छाएँ
और बच जाती है मुझमें
सम्यक जीवन
जीने की अभिलाषा ....
- भास्करानंद झा भास्कर
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8 घंटे पहले

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