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एक ही गलती हर दफा करता रहा मैं

Bhartendu Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक ही गलती हर दफा करता रहा मैं
        
                                                    
                            
रुकना सीखा नहीं बस चलता रहा मै

बन गया मैं अपने ही दिल का कातिल
कहना था दिल की बात तो डरता था मै

खुश रहता हूं न जाने किन बातों पर
तन्हा ही ग़मों में संभलता रहा मैं

कितना पसंद है मेरा गम लोगों को
बेमतलब महफिल में चमकता रहा मै
2 महीने पहले
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