मनुष्य को सीप के स्वभाव स्वरुप होना चाहिए
सीप का ऊपरी आवरण कठोर होता है
पर अंतः बहुत ही कोमल एवं सजग रहता है
वैसे ही मनुष्य को अपने को बनाना आवश्यक है
जिस तरह सीप खतरा महसूस करता है
तोअपने कठोर आवरण संपूर्ण ढक लेता है
उसी तरह मनुष्य को हमेशा अंदर से स्वभाव कोमल रखना चाहिए
जब कभी आए आपात स्थिति मे अपने को कठोर बनाना चाहिए
मनुष्य को सीप के स्वभाव स्वरुप होना चाहिए
-भागवत प्रसाद नायक