साहित्य देश का दर्पण है
कविता कवि का अर्पण है
कविता की सार कवि का समर्पण है
देश के वर्तमान स्थिति का दर्पण है
अब साहित्य देश में अपठनीय है
अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम ही सार है
बाकी सब बेकार है
इलेक्ट्रॉनिक मिडिया अफवाह और झूठ है
ऐसा नहीं कि यह ऊपयोगी नहीं है
पर संचार में गलत लोगों का हाथ है
यह कोई इलेक्ट्रॉनिक गजेट नहीं कि
मालवेयर को कोई एप से साफ किया सके
यह तो देश भाई, विभिन्न विचारों का मेल है
साहित्य की परम्परा अमिट लेख है
कोई कविता, कोई लेख समाचारपत्रों छपती है
और इसका वितरण पूरे देश दस्तावेज की तरह होता है
साहित्य की परम्परा एक अमिट छाप है
हर काल उपलब्ध रहेगी
इसका मंथन हर काल होता रहेगा
जैसे ताडपत्र में लिखा साहित्य का मंथन हो रहा है
वैसे ही भविष्य में इस काल के साहित्य का होगा
तब देश इस काल कैसा था?
साहित्य देश का दर्पण है
और ये सब देश को अर्पण है
- भागवत प्रसाद नायक