स्नान के बाद प्रभु प्रार्थना से दिन आरंभ होता है
यह प्रार्थना निरन्तर एक कडी के समान चलती है
प्रार्थाना का स्वरुप अलग-अलग तरह होती है
मंदिर मस्जिद, चर्च आदि अलग-अलग होती है
प्रार्थना का कारण भी अलग-अलग होती है
निर्धन ,असहाय ,वृध्द ,दिव्यांग कई तरह लोगों है
ईश्वर सब लोगों के संताप,बिमारी ,बुढापा का ध्यान रखते हैं
इस तरह ईश्वर के प्रर्थाना की कडी चलती रहती थी.....
-भागवत प्रसाद नायक