प्रातः काल में पक्षियों मधुर कलरव
सर्द हवा की शीतलता से सिहरन
उगते भास्कर के रक्ताभ आकाश
अति मनमोहक धरती पर छटा
प्रातःकाल की सर् बहती सर्द पवन
तन-मन को मोहती पक्षियों कलरव
मधुर ध्वनि व रक्ताभ आकाश
एक ऐसी मधुर ध्वनि और बहती पवन
जो मुझे किसी और दुनिया को
पर ले चली जिसे शायद स्वर्ग कहते हैं
-डाॅ भागवत प्रसाद