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कहां गुम हो गये हम

Bhagwat Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आजादी हमने पा ली, कहां गुम हो गये
        
                                                    
                            
पूरा देश खुश था आजादी से
मुख्य उद्देश्य को भूल कर, कहां गुम हो गये
गरीब तो गरीब रह गये
अमीर और अमीर हो गये
ये विषमता क्यों ?
अन्नदाता, जो देश के हर जन खिला रही है
वही अन्नदाता भूमि स्वामी से भूमिहार रह गई है
अंग्रेजों जो चाह रहे वही हो रहा है
आखिर क्यों?
सरकार अनुदान राशी इधर-उधर बांट रही है
पर अन्नदाता किसान आत्महत्या कर रहा है
आखिर किसानों क्यें नहीं?
क्या देश को अनाज की जरुरत नहीं है
किसानों को ज्यादातर अनुदान की आवश्यकता है
ठीक है देश तरक्की कर रही है
पर यक्ष प्रश्न है कि
तरिक्की के लिए चांद और मंगल ग्रह जाना जरुरी है
दूसरै देश को दिखाने के लिए, यह अनावश्यक ख़र्च क्यों?
देश मे गरीबों की संख्या कम होना जरुरी है
किसान खूब फसल उगायेगा, उसे लाभ होगा
तो खूब फसल उत्पादन करैगा
देश धन्य-धान्य से भरपूर होगा
तो भी देश समुन्नत होगा
न गरीब किसान होगा
और न गरीब होगा
जन-जन खुश होगा
तो देश खुश होगा
आजादी हमने पा ली है
और हमकहां गुम हो गए हैं
- भागवत प्रसाद नायक
8 महीने पहले
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