आज सब लोग संसार में अनुचर हैं
बस फर्क इतना है कि
कौन बड़ा अनुचर है ?
देश के माननीय राष्ट्रपति भी
किसी के अनुचर होगें ही
यदि इस संसार में कोई मालिक नहीं
तो ईश्वर तो उनका मालिक हैं ही
पृथ्वी लोक में सब मनुष्य
एक दूसरे पर परस्पर अवलंबित है
तो इसका अर्थ ये हुआ कि
एक-दूसरे के मालिक और अनुचर भी हैं
यदि भावार्थ में जायें तो
इस संसार में कोई अनुचर नहीं है
विश्लेतीत अनुवाद के तथ्य के अनुसार
अनुचर शब्द को विलोपित करना चाहिए
इसका अर्थ कदापि नहीं है कि
शब्द कोष से इसे हटा देना चाहिए
-भागवत प्रसाद नायक