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बस्ता

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अलमारी के कोने पर देखा बस्ता
        
                                                    
                            
बचपन सारा खोने पर देखा बस्ता
टूटी पेंसल कुछ पन्नो को साथ लिए
कतरा कतरा होने पर देखा बस्ता
छोटी सी इक टाई पर इक बैच लगा
यादें धूमिल होने पर देखा बस्ता
छोटे छोटे टुकड़ो में कुछ रंग पड़े
रंग हज़ारो खोने पर देखा बस्ता
कागज़ की इक नाव साथ पतवार लिए
मौसम सारे खोने पर देखा बस्ता
उलटी सीधी शक्ल बनाई यारो की
यार पुराने खोने पर देखा बस्ता
चूरन पुड़िया टॉफी के अवशेष मिले
जीवन खट्टा होने पर देखा बस्ता
गाढ़ी स्याही से था उसपर नाम लिखा
सारी यादें धोने पर देखा बस्ता
कागज़ में लिपटी थी इक तस्वीर मिली
जिसका बस्ता ढोने पर देखा बस्ता
ग्रीटिंग के कुछ कार्ड संभाले रखे थे
कितने साल गुजरने पर देखा बस्ता
बचपन के लम्हात अभी तक है ज़िंदा
खुद को बूढ़ा होने पर देखा बस्ता


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6 वर्ष पहले
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