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उसे क्या गुलाब दूं

Basant panwar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसे क्या गुलाब दूं , वो खुद एक गुलाब है ।
        
                                                    
                            
करती मुझसे सवाल है,
जबकि मेरे हर सवाल का वो जवाब है।
उसको गिला है , शिकवा है आजकल वो मुझसे रुखसत है
उसे मेरे लफ्जों पर न उतार पाऊं वो इतनी खूबसूरत है
वो मेरी जीत है , मेरी हार है
मेरी जिंदगी में मिला सबसे कीमती उपहार है

उसे क्या गुलाब दूं वो खुद एक गुलाब है।

1 बेवफा के कारण , मैने उस सच्ची पगली को छोड़ दिया
खफा होकर उस पगली ने हमेशा के मुंह मुझ से मोड़ लिया
इस बात का मलाल रहेगा मुझको उम्र भर
उसे वापस पाने के लिए क्या यत्न करुं या इम्तेहान दूं

वो खुद 1 गुलाब है उसे क्या गुलाब दूं

मैं उसे कभी समझ ही नहीं पाया, उसके नखरे में कभी उठा ही नहीं पाया ।
अब वो मेरे साथ नहीं है
साथ में बस उसकी यादें और मेरे कुछ अल्फ़ाज़ हैं

उसे क्या गुलाब दूं वो खुद एक गुलाब है ।
-बसंत प्रजय
एक वर्ष पहले
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