दुर्गा सा पूजा जिसे, क्यों द्रौपदी सा चीर-हरन किया
लक्ष्मी सा चाहा जिसे, उसी का फिर क्यों दहन किया
मानव से आज बना है दानव , दानव से बना है काल
राम-रहीम की धरा पे देखो नारी ने क्या-क्या सहन किया
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