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माँ का आँचल की छाँव कभी नहीं भूलेंगे

Balendra Giri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अमर आशीर्वाद धुंधली नहीं हुई हैं यादें, वक़्त भले ही बीत गया।
        
                                                    
                            
यादों में तू अब भी साक्षात् है माँ।।
तेरा वो निस्वार्थ समर्पण, इस दुनिया से जीत गया।
कुछ महीने पहले छोड़कर मेरा हाथ, विदा आप हुई हमसे हो माँ।।
छोड़ गई सारी दुनिया ईश्वर में हो गई विलीन हो आप।
पर छोड़ गई जो प्यार का सागर, वो धड़कन मेरी हो गई हो माँ।।
लोग ढूँढ़ते हैं ईश्वर को, ऊँचे-ऊँचे धामों में, मैंने तो हर पल पाया है, तुझको अपने कामों में।
जब भी कोई मुश्किल आए, या डगमगाए मेरे कदम, तेरी दी हुई सीख जगाती है माँ ।।
आज अगर आप चली गई हो इस दुनिया से, पर दूरी का कोई अहसास नहीं।
आप तो मेरी हर साँस में है माँ।।
भले ही भौतिक पास नहीं, गहरी काली रातों में भी, जो राह मुझे दिखलाता है।
वो और कुछ नहीं तेरा साया बनकर आता है माँ।।
एक अटूट विश्वास है दिल में, जो कभी न कम हो पाएगा।
आप का आशीर्वाद सदा मेरे साथ है, और सदैव ही रहेगा माँ।।
तेरी दुआओं का वो कवच, हर संकट को हर लेता है।
अदृश्य रूप में हाथ तेरा, मेरे सिर पर हिम्मत देता है माँ।।
तेरा वो वात्सल्य अनोखा, मन मंदिर में ज़िंदा है।
तुझसे ही मेरा अस्तित्व, तुझसे ही ये बशिंदा है माँ।।

भौतिक रूप में विदा हुई, पर आत्मिक रूप में पास है आप।
मेरी हर छोटी से छोटी ख़ुशी में शामिल है आज भी आप साक्षात् है माँ।।
आज भी आप साक्षात् है माँ....आज भी आप साक्षात् है माँ.....
-बालेंद्र गिरी
 
एक घंटा पहले
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