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यादें

Bajrangi Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ओ बचपन की यादें,ओ वनविहार की गलियां
        
                                                    
                            
जिन्हें चूमकर बने दोस्त हम,ओ तेरी दो उंगलियां
ओ दुकान पर घमंडी की बोलियाँ,ओ कालेज में
तूने बनायी थी रंगोलियां,भुलाए न भूलती हैं तेरी ओ ठिठोलियां.


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6 वर्ष पहले
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