सुकून से बढ़कर इस जग में, कोई और दौलत नहीं,
हर किसी को ज्ञान बांटने की, अब कोई जरूरत नहीं।
जो जैसा खुश है, उसे उसी के हाल पर छोड़ दीजिए,
ज़िंदगी अपनी है, बस इसे अपनी ही मौज में जी लीजिए।
बेवजह की बहसों में, क्यों अपना खून जलाना?
नासमझों की बातों पर, क्यों अपना वक़्त गँवाना?
कोई ज़िद पर अड़ जाए कि दिन में भी तारे चमकते हैं,
तो हामी भरिए और कहिए— "वाह! क्या खूब दमकते हैं!"
अपनी ऊर्जा बचाइए, चेहरे पर मुस्कान बनाए रखिए...
और बेफिक्र होकर अपनी चाय का मज़ा लीजिए!
— बजरंग बीकानेरी