गुरु ने ज्ञान की ज्योति जलाई, हुआ जीवन में उजियारा,
कठिन पथों पर चलना सिखाया, दिया हर मंज़िल का ज्ञान।
माँ की ममता में पले-बढ़े थे, कराया देश-धर्म का भान,
प्रेरणा का प्रकाश हैं शिक्षक, ज्ञान का अद्भुत भंडारा।
गिरकर उठना और संभलना, शिक्षक ही बतलाते हैं,
अक्षर-अक्षर पाठ पढ़ाया, दे दी सपनों को उड़ान।
माटी जैसा जीवन पाया, गुरु जी ने दी सुंदर-सी पहचान,
अनुशासन भी खूब सिखाया, तारीफ़ करूँ उनकी हर बार,
हर कमजोरी को दूर भगाया।
सत्य-धर्म का पाठ पढ़ाया, विनम्रता ला दी दिल में,
कर्तव्य-पथ पर डटे रहो, गुरु ने सबको यही बतलाया।
गुरु की शिक्षा, गुरु का ज्ञान, जिस मानस ने ठुकराया,
पछताया होगा जीवन भर, समय हाथ न आया होगा।
जीवन के सच्चे मार्गदर्शक गुरु हैं, उनका तो हर कहना मान,
वे सहभागी हार-जीत में, उनकी हर डाँट में प्रेम छिपा।
शब्दों में आशीष झलकता, सच्चा ज्ञान विशेष मिला,
उनके चरणों में आनंद मिले और सुकून का निस्तारा।
कलम की ताकत उनसे पाई, विचारों का विस्तार मिला,
अजीमुद्दीन, नमन करूँ गुरुओं को, जिन्होंने जीवन संवारा।
आदर्श हमारे शिक्षक अपने, उनसे ही जग उजियारा।