आज मिलना मिलाना अज़ी छोड़िए
और बातें बनाना अज़ी छोड़िए
रोज़ ऐसे मुलाकात मुमकिन नहीं
रोज़ बाहर बुलाना अज़ी छोड़िए
शाम के नाम पर रात काली गयी
सिर्फ दिल था दुखाना अज़ी छोड़िए
रोज़ मन ठीक हो ये जरुरी नहीं
बेवजह मुस्कुराना अज़ी छोड़िए
काम दफ्तर सभी आप करते रहो
आज हमको घुमाना अज़ी छोड़िए
आज पहला दिवस ख़ास है साल का
आज भी इक बहाना अज़ी छोड़िए
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