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हम ने क्या-क्या तेरी उल्फ़त में...

Azhar Sabri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम ने क्या-क्या तेरी उल्फ़त में गँवाया है न पूछ।
        
                                                    
                            
वक़्त ने किस तरह यादों को बुझाया है न पूछ।

दर्द को हमने दुआ समझा तो दिल हल्का हुआ,
किस तरह इक ज़ख़्म ने हमको बचाया है न पूछ।

अब तो हर इक ख़्वाब की ताबीर धुँधली है बहुत,
वक़्त के दरिया में क्या-क्या डूब आया है न पूछ।

एक मुद्दत से कोई ख़त भी नहीं आया मगर,
दिल ने हर आहट को उसका ख़त बताया है न पूछ।

वक़्त की गर्दिश में कितने आईने टूटे मगर,
कौन-सा चेहरा था जो दिल से न मिट पाया न पूछ।

आईना अब पूछता है, मैं वही हूँ या नहीं,
वक़्त ने मुझको कहाँ से क्या बनाया है न पूछ।
- अज़हर साबरी
एक महीने पहले
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