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स्वयं हृदय धड़क रहा है

Ayush Sanjaymeshram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिनकर चमक उठा है ।
        
                                                    
                            
स्वयं हृदय धड़क रहा है

काटो में चलने का प्रण लिया है।
पैरों ने दर्द को सहा है ।

आंखों में एक उम्मीद है किरण की।
उस किरण ने झंझोर दिया है।

सपनो ने भी अपनों को खो दिया है

संघर्ष क्या जानेगा ,पीड़ा क्या जानेगा
उसने तो स्वयं को झोंक दिया है ।
2 महीने पहले
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