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धोखेबाज़ हो गया

Ayush Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब इस खुशहाल आँखों की गली में ग़म के आँसू आने लगे हैं,
        
                                                    
                            
ग़ालिब, मीर या रसखान—सब दीवाने लगने लगे हैं।

इश्क़ के मारे सब आशिक़ दिन की जगह रात में जागने लगे हैं,
और हम ख़ुद मोहब्बत पर क्या कहें, हम तो ख़ुद ख़ुशी को छोड़कर ख़ुदकुशी करने लगे हैं।
— आयुष शर्मा
2 घंटे पहले
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