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आपातकाल

Awadhesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आपातकाल की यादें गड़े मुर्दे उखाड़ आई हैं
        
                                                    
                            
शिथिल राजनीति में नई उबाल लाई है
21 महीने का आपातकाल नई भूचाल लाई है
उखाड़ दी गई जम्हूरियत की जड़ें उसकी शाखाएं.
नसबंदी ने मानव समाज को नपुंसक बना डाली थी.
यह फतवा था या फरमान देश में भूचाल लाई थी.
रोक दी गई विधि व्यवस्था की तराजू
मौलिकता के अधिकार की जनाजा निकाल लाई थी
धूल फांकने लगे प्रेस और मीडिया
प्रतिबंध की उस पर शामत लाई थी
कत्ल गारत की रची गई थी पृष्ठभूमि
राजनीति से मनोरंजन तक लोगों की शामत लाई थी
काली स्याही से लिखी गई है यह पृष्ठभूमि
जनतंत्र के मंदिर पर आपातकाल लगाई थी

- अवधेश कुमार राय
नोएडा, उत्तर प्रदेश

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8 वर्ष पहले
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