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नवगीत

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नवगीत
        
                                                    
                            

है चुनाव में हारे नेता
बुक्का फाड़ रहे।

भयंकर घटना घटी
आती है घिन।
कलुषित सा है लगता
चमकीला दिन।।

मँहगाई ने ऐसा पीसा
केवल हाड़ रहे।

राजनीति गंगा थी
अब नाला है।
अहिंसा के हाथ में
ज्यों भाला है।।

संसद में बैठे रहनुमा
हैं झोंक भाड़ रहे।
-अविनाश ब्यौहार
 
एक महीने पहले
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