ठंडी का है आगमन, वर्षा का प्रस्थान।
मौसम को रहता सदा, है ऋतुओं का ज्ञान।।
है ऋतुओं का ज्ञान, समय पर सब है आतीं।
पहर हुआ है पेड़, डाल पर चिड़ियाँ गातीं।।
चली समय की रेल, हरी होती है झंडी।
नरम-मुलायम धूप, बताती आई ठंडी।।
-अविनाश ब्यौहार