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सो रहे कहां बेदारी है

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सो रहे कहां बेदारी है।
        
                                                    
                            
पेड़ों को काटे आरी है।।

बिन उपदा के काम न होता-
औ दफ्तर वो सरकारी है।

रोजगार के अवसर कम हैं-
हुई देश में बेकारी है।

तुमने कहा अदालत जाओ-
किंतु वहां मारामारी है।

वादे सारे पूरा करना-
अब ये नेता की बारी है।
-अविनाश ब्यौहार
 
2 महीने पहले
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