सो रहे कहां बेदारी है।
पेड़ों को काटे आरी है।।
बिन उपदा के काम न होता-
औ दफ्तर वो सरकारी है।
रोजगार के अवसर कम हैं-
हुई देश में बेकारी है।
तुमने कहा अदालत जाओ-
किंतु वहां मारामारी है।
वादे सारे पूरा करना-
अब ये नेता की बारी है।
-अविनाश ब्यौहार
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