विज्ञापन

लॉकडाउन और स्वच्छता

Atul Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वच्छता को बनाये आधार,
        
                                                    
                            
कोरोना को करे निराधार।

कोरोना का मूल उपाए,
सामाजिक दूरी ही अपनाये।

हाथ धोये, मुँह ढके।
खुद बचे, दूसरों को बचाये।।

चलो देशभक्ति दिखाते है,
कुछ दिन घर मे ही रह जाते है।

लॉकडाउन कहाँ सबके लिए एक जैसा हैँ,
कही ठंडे चूल्हे ।
कही खाली बर्तन,
कहीं व्यंजनों की कतार है।।

लॉकडाउन से सीखी एक बात,
जीवन असंभव बिना किसान उत्पाद।


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kahar

5 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

385 कविताएं

View Profile

Prashant Sharma

2 कविताएं

View Profile