विज्ञापन

बाल कविता

Atul Kumar Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काले-काले मेघा प्यारे,
        
                                                    
                            
देखो कितने लगते न्यारे।
भरकर गर्जन हमें डराते,
बरसा करके फिर इतराते।
आओ देखें दृश्य निराले,
उड़ते कितने कौवे काले।
कोयल देखो झूम रही है,
मेघा मानो चूम रही है।
मेंढक टर-टर बोल रहा है,
कछुआ मुॅंह को खोल रहा है।
उड़ते तोते झुंड बनाकर,
मम्मी देखो जल्दी आकर।
पौधों में है खुशी निराली,
मन-मन में मुस्काता माली।
दृश्य देखने तुम भी आओ,
दिल में अपने इसे बसाओ।।
-अतुल कुमार शर्मा
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamlesh ranjan

1 कविता

View Profile