कविता क्या है, खुद जानती है कविता
किसी के लिये व्यर्थ-कोरी बकवास है कविता
किसी के सिर चढ़कर घुड़सवार है कविता
किसी के लिये सर्द रात का अंधेरा है कविता
किसी के लिये विचारों का संघर्ष है कविता
किसी के लिये शब्दों का विस्फोट है कविता
किसी के लिये रूप-धूप का परिधान है कविता
किसी के लिये बौद्धिकता का आभास है कविता
किसी के लिये प्रयोग का आकाश हेै कविता
किसी के लिये विसंगतियों का लिबास है कविता
किसी के लिये मौसम का प्यार है कविता
किसी के लिये प्यार का बुखार है कविता
किसी के लिये चांद का चेहरा है कविता
किसी के लिये प्रकृति का शेहरा है कविता
पीव कविता का मर्म सिर्फ जानती है कविता
कविता क्या है खुद स्वयं ही जानती है कविता।।
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