जीवन की कहानी
मेरी जिन्दगी में
कदम बहकते रहे हैं
बचके निकलना था मुश्किल
बेदाग निकलते रहा हूूूं।
माना कि कई भूले
मुझे जीने नहीं देती
जो उठाये थे कदम मैंने
बहुत सोच समझके
मन में घुटती रही थी आहें
मैंने रवानगी दी है।
सहमी सहमी सी है
अन्जानी सी यादें
मीत थे वे हुये पराये
जो पास थे लौट के न आये
पीव आॅखें से छलके
गिरते रहे मेरे आॅसू
जीवन की दर्दभरी
कहानी यही है।
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