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मुझे भी ले जाना

Ashwani Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूं मुझसे लिपट जाना,
        
                                                    
                            
और वो आंखों का नम हो जाना।
मौसम का हल्का हो जाना,
मधम्म सी आवाज का भारी हो जाना।
वो गीली सी हथेलियों की गरमाईस,
छुपा के दर्द,
मुस्कुराहट की नुमाईस।
वो डेढ़ कदम आगे बढ,
पीछे मुड़ कर फिर देर तक निहारना।
वो बस की खिड़की का कांच सरकाना,
छुपा के सब से वो हाथों का हिलाना।
दूर तक देखा मैंने,
तेरा वो भीड़ में खो जाना।
अच्छे से याद है मुझे अब भी,
वो अपने साथ तेरा मुझे भी ले जाना,
मुझे भी ले जाना।
Asni


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6 वर्ष पहले
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