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माँ की ममता

Ashutosh Chaudhary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            
माँ

आँचल में जिसके थम जाए संसार,
ऐसी ही होता है माँ की ममता का प्यार
नव जीवन जो देती है,
काल तरण जो करती है
मन मानुष का अर्पण करती है,
दिशा को भी दर्पण देती है
एक माँ ही वो होती है,
जो हर विष का रस पान करती है
न भोग विलाप करती है,
बस अपनो में ही खुश रहती है
हर कुटुंब को वो कटिबद्ध करती है,
अपनी अभिलाषाओ को वो हरती है
हर माँ पार्वती कौशल्या होती है,
जिसके मन मे बच्चे की हर पीड़ा होती है
अमृतपान जिसके तन में दे जाता है दस्तक,
जिसके आगे देव लोक भी हो जाता है नतमस्तक
हे माँ तुझपे ये मेरा तुच्छ शीश अर्पित,
तेरे लिए सदैव मेरा यथार्थ जीवन समर्पित

स्वरचित
आशुतोष कुमार (स.अ.)
प्राथमिक विद्यालय बन्दीपुर
शि. क्षे.- हथगाँव ,फतेहपुर(उ.प्र.)
2 वर्ष पहले
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