जीवन में जो होने वे नुकसान नहीं रुकते !
कुछ घावों से वीरों के अभियान नहीं रुकते !
कदम-कदम पर बाधाएं आंखें दिखलतीा हैं ,
शत्रु-शक्तियां तरह-तरह से तीर चलाती हैं ,
रखें इरादे पक्के वे इंसान नहीं रुकते !
कुछ घावों से वीरों के अभियान नहीं रुकते !
ठोकर तो राहों के गहने इनसे डरना क्यों?
मरने से पहले जीवन में पल-पल मरना क्यों ?
संकल्पों पर ईश्वर के वरदान नहीं रुकते !
कुछ घावों से वीरों के अभियान नहीं रुकते !
गिर-गिर कर जो उठते वे ही मंज़िल पाते हैं,
नहीं भीड़ में ढलते अपनी राह बनाते हैं,
कुछ असफलताओं से लक्ष्य-संधान नहीं रुकते!
कुछ घावों से वीरों के अभियान नहीं रुकते!
इनकी गाथा की खुशबू बसती है हवाओं में,
इनकी कीर्ति-पताका फहरे दसों दिशाओं में,
सदियों तक इन लोगों के गुणगान नहीं रुकते!
कुछ घावों से वीरों के अभियान नहीं रुकते!